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*** छुपाकर रखूंगा दिल में ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

October 9, 2017

छुपाकर रखूंगा दिल में तुझको मैं अपने

दिखाकर रखूंगा शीशा-ए-दिल में अपने

घर-दिलअपना ना तूं जाये ना जाने मैं दूं

कहने दे अब तो रहने दे दिल में अपने ।।

?मधुप बैरागी

बेकाबू है आज दिल अपना यारो

फिर कहो स्वप्न कैसे हो काबू यारो

दिन फिर भी निकल जाता है सब्र

रात बेकाबू – काबू कैसे हो यारों ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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