Mar 31, 2017 · मुक्तक
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छुआ जब से मुझे तूने

लगी है आग तनमन मे छुआ जब से मुझे तूने
बड़ी बेचैन है साँसे छुआ जब से मुझे तूने
मनाया लाख दिल को मैं मगर ये बात माने ना
निगाहें इक तुम्हें ढूँढे छुआ जब से मुझे तूने

– ‘अश्क़’

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Ashok Ashq
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