छुआ छूत दूर करो

छुआ छूत दूर करो,
समाज को एकजुट करो।
अभी से शुरुआत करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

जात – पात की सीमा तोड़ो,
प्रेम लता से बंधन जोड़ो।
अभी से तो सुधार करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

सदियों से बहती आई गंगा,
सबकी मैल धोती आई गंगा।
अभी से तो स्वच्छ करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

भुला जाओ पुरानी बातों को,
जो रखते थे इन आदतों को।
अभी से तो समझदारी करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

मत भागो मिथ्या के पीछे,
नए जीवन को स्वच्छ जल से सीचे।
अभी से तो हरा भरा संस्कार करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

महंता की ज्ञान करो,
मानवता की पहचान करो।
अभी से तो जागरुक करो,
नवीन भारत की निर्माण करो।।

कवि – जय लगन कुमार हैप्पी

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