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छाेटा सा हूँ बच्चा

छाेटा सा हूँ बच्चा,
अक्ल का हूँ कच्चा,
दिल का हूँ सच्चा,

मेरा चंचल मन,
छाेटा सा तन,
नही चाहिए धन,

मुझकाे मिले प्यार
करे सब दुलार,
खुशियाँ मिले अपार,

चलता हूँ मटक मटक,
चीजाे काे देता हूँ पटक पटक,
मम्मी की है ललक ललक,

चलकर नही थकता,
गिरकर नही रुकता,
रात काे नही जागता,

अच्छा लगता झूलना,
दादा दादी काे नही भूलना,
तुतलाकर नही बाेलना,

घर का हूँ राजकुमार,
करता हूँ सबका सत्कार,
सबकाे हैं मुझसे प्यार,
।।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...
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