छन हुई काजल कह दूँ

छन छन हुई झनकार बजी ज़ोर से पायल कह दूँ,
सोचता हूँ कजरारी आँखों में झाँक कर तुझको काजल कह दूँ।
धूप में जो तू राहत है तो लट को तेरे छाया कह दूँ,
यूँ ही रही बरसती जो तू वर्षा ऋतु की काया कह दूँ,
रूप बदलता तेरा पल पल रब की तुझको माया कह दूँ,
न माने जो कोई तो फिर रब खुद है आया कह दूँ।
मुझे इजाज़त तू दे दे तो खुद को तेरा कायल कह दूँ,
डगमगाने को तैयार है लमहा खुद को तेरा घायल कह दूँ,
तू दीवानी है अगर तो मैं खुद को फिर पागल कह दूँ,
बादल भ्रमण करते अम्बर में या फिर तेरा आँचल कह दूँ।
अनसुनी सी अनकही सी तुझको एक कहानी कह दूँ,
दुनिया सारी एक तरफ हो तन्हा रुत की रवानी कह दूँ,
मीरा कहूँ या कह लूँ राधा या पगली दीवानी कह दूँ,
आज़ाद परिंदा है वो कोई उसको यार आसमानी कह दूँ।
छन छन हुई झनकार बजी प्यार से पायल कह दूँ,
बस कजरारी आँखों में झाँक कर तुझसे काजल कह दूँ।
©® Adv Sandarbh Mishra,
Varanasi,
Uttar Pradesh,
India
04.03.2019
08:30 AM

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