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छन्न पकैया ......

छन्न पकैया छन्न पकैया, बसंत राजा आये…
बगिया में फूल खिले हैं, भँवरे भी मंडराएं…
छन्न पकैया छन्न पकैया,अपनी दिल की बोली..
नासमझा कूंएं में जा, जो समझा हमजोली…
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/सी. एम्. शर्मा

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CM Sharma
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उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की...