छटपटी ......बलात्कारी आशाराम को समर्पित

बलात्कारी आशाराम को समर्पित
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आशाराम की आस को, खा गया है काम
(काम ….वासना)
ईश्वर दर्शन अब कहां , देगें आशाराम
देगें आशाराम , चमत्कार काम ना आवें
संविधान से बडा नही कोई, गीत ये गावें
कह “सागर” कविराय, ये बाबा अत्याचारी
जिसको देखो वही निकलता,बलात्कारी

बैखोफ शायर/कवि/लेखक….
डाँ. नरेश कुमार “सागर”

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