छंदमुक्त कविता

बहुत ज्यादती कर लिया हमने
अपनों की ना खबर लिया हमने

शराफत से अब काम नहीं चलता
ईंट के बदले पत्थर लिया हमने

उनके घर से निकले से पहले
हर रोज एक नज़र लिया हमने

जिसके वजूद से सुकून ही हो
ऐसा तो हमसफ़र लिया हमने

ठंडक भरा हो जिसके साये में
बैठने का वो शजर लिया हमने

जमाना तो रूसवाइ ही देता” नूरी”
हर सितम दिल में भर लिया हमने

नूरफातिमा खातून “नूरी”
कुशीनगर

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