छंदमुक्त कविता

रेत सी फिसलती है जिंदगी,
पल भर में बदलती है जिंदगी।

हम सोच नहीं सकते ख्वाबो में,
कैसी-कैसी राहों पर चलती है जिंदगी

हालात को बांधना बस में नहीं
सुख-दुख में गुजरती है जिंदगी।

हमसफ़र से जिंदगी है आसान
तन्हाइयों में खटकती है जिंदगी।

मां-बाप के दिल में जगह बना ली
फिर तो फलती फूलती है जिंदगी।

रेत सी फिसलती है जिंदगी,
पल भर में बदलती है जिंदगी।

नूरफातिमा खातून नूरी शिक्षिका
जिला-कुशीनगर

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