चोर चोर मौसेरे भाई।

चोर चोर मौसेरे भाई।
हम नेता खाएंगे मलाई।।

बोतल बदली ‘धवल’ हो गई,
दारू वही, वही उबकाई।।

कितने भी चश्मे बदलें हम,
तकदीरों में लिखी रुलाई।।

सगरे नेता देवर बन गए
मतदाता सबकी भौजाई।।

जंघिया बनियाइन में निकले
खरबों की अब है ठकुराई।।

एक बात में सब माहिर हैं
पानी में दें आग लगाई।।

नेता प्रेतयोनि का वंशज
‘धवल’ वेष में विचरे भाई।
चोर चोर मौसेरे भाई।।

रचना -प्रदीप तिवारी ‘धवल’

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