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चोर चोर मौसेरे भाई।

प्रदीप तिवारी 'धवल'

प्रदीप तिवारी 'धवल'

कविता

December 17, 2016

चोर चोर मौसेरे भाई।
हम नेता खाएंगे मलाई।।

बोतल बदली ‘धवल’ हो गई,
दारू वही, वही उबकाई।।

कितने भी चश्मे बदलें हम,
तकदीरों में लिखी रुलाई।।

सगरे नेता देवर बन गए
मतदाता सबकी भौजाई।।

जंघिया बनियाइन में निकले
खरबों की अब है ठकुराई।।

एक बात में सब माहिर हैं
पानी में दें आग लगाई।।

नेता प्रेतयोनि का वंशज
‘धवल’ वेष में विचरे भाई।
चोर चोर मौसेरे भाई।।

रचना -प्रदीप तिवारी ‘धवल’

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Author
प्रदीप तिवारी 'धवल'
मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी... Read more

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