चोट लगी नही अभी

चोट लगी नही अभी,
और हम मरहम ढूँढने लगे,
सबने कहा इश्क़ है,
और इसकी हरम ढूंढने लगे,
गली में उनकी जाने की बात हुई,
और हम सनम ढूंढने लगे,
सोचकर उनके बारे में लिखने,
हम कलम ढूंढने लगे,
ख्यालों में उनके इतने डूबे,
बैठे बैठे हम ऊँघने लगे,
बस वो ही बेखबर है,
उनके बारे में ज़माने पूछने लगे,
अभी तो वो मिला ही नही,
हम सातो जनम ढूंढने लगे,
बस देखा था एक नज़र उसने,
और हम मोहब्बत करने लगे,
मुलाकातों की सोचकर,
धड़कने बढ़ने लगे,
मोहब्बत में ये दिल तो बस,
एक ही शख्श पर अड़ने लगे,
गली में इश्क़ की,
हम सुकून ढूंढने लगे,
मोहब्बत का इज़हार करते ही,
वे शरम ढूंढने लगे,
अभी इश्क़ हुआ ही था,
और हम बिछड़ने लगे,
इस मतलबी दुनिया मे,
दोनों अपना करम ढूंढने लगे,
वो नादान दिल्लगी थी,
हम अब सम्हलने लगे,
बेवफाओ की बाज़ार में,
वफादार सनम ढूंढने लगे,
मोहब्बत तो हमारी अधूरी रही,
वो दूसरा सनम ढूंढने लगे,
एक जख्म भरा नही था अभी,
और नया गम ढूंढने लगे,
चोट लगी नही अभी,
और हम मरहम ढूंढने लगे,
मरना बाकी है अभी,
और हम कफ़न ढूंढने लगे ।।

– विनय कुमार करूणे

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