कविता · Reading time: 1 minute

चोट (पिरामिड विधा)

1
दी
चोट
उसने
तन जख्मी
बोल कड़वे
टूटा दिल मेरा
खंजर सा आघात

2
है
चोट
बेवफा
तड़पाती
तन मन को
मरहम प्यार का
दे जीने की ललक

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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