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चैन कहाँ आराम कहाँ अब

बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा

गज़ल/गीतिका

January 6, 2017

चैन कहाँ आराम कहाँ अब
खुशियों वाली शाम कहाँ अब

जिसने प्रेम सिखाया जग को
राधा का वो श्याम कहाँ अब

इक दूजे के लिये बने, वो
लक्ष्मण सीता राम कहाँ अब

यहाँ वहाँ बस घूम रहे सब
जाते चारों धाम कहाँ अब

बचपन में जो छुप छुप तोड़े
बगिया के वो आम कहाँ अब

करतीं सारे काम मशीनें
है गरीब को काम कहाँ अब

हाय हलो है चलते चलते
दिल से दुआ सलाम कहाँ अब

जिसे लगाया था बचपन में
माँ की मरहम बाम कहाँ अब

यूँ तो शायर बहुत हो गए
पर ग़ालिब सा नाम कहाँ अब

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Author
बसंत कुमार शर्मा
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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