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बेचे खड़ा भविष्य यूँ,बीच सड़क पर फूल

लिए उदासी आँख मे, चढ़ी शकल पर धूल !
बेचे खड़ा भविष्य यूँ,बीच सड़क पर फूल ! !
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बेच रही है नन्ही बिटिया ,… हाथों मे ले अपने फूल !
बिक जाएँ प्रभु फूल हाथ के,करिए मेरी दुआ कबूल !

नही पढाएगी बच्चों को,जब तक ये मेरी सरकार !
सपने मेरी भारत माँ के, कभी नही होंगे साकार ! !
रमेश शर्मा

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RAMESH SHARMA
RAMESH SHARMA
मुंबई
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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !...
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