Jun 28, 2020 · कविता
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शौर्य उद्घोष

चेत धरा के रिपु समस्त!
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
हम सत्य अहिंसा के परिचायक,
शान्ति धरम के हम हैं नायक,
एक और सुन,
शौर्य पराक्रम भी मेरी पहचान है,
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
चाहे भूक जिस दिशा से,
तू श्रृंगाल,
बदल बदल कर अपनी चाल,
रात्रि प्रहर का अस्ताचल बस तू चांन है,
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
औरौ के चितरंजन हेतु,
हमने निज भू-अंग छिन्न-भिन्न किया,
विस्तृत भूमि संकीर्ण किया,
मत सोच क्षण विशेष सदृश हम नादान हैं,
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
जब हम करते हैं हुंकार,
अचल चट्टान भी उड़ जाते,
बन खरपतवार,
फिर तू क्यों करता अभिमान है,
यह हिन्दुस्तान नहीं ,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
जब उठेगा मेरा भुजा शस्त्र,
धरती,अंबर होगा परास्त,
महा प्रलय युद्ध तब आएगा,
ललकार नहीं, यह मेरा स्वाभिमान है,
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।
मत सोच हमको जीर्ण-शीर्ण,
खंडित भू-अंग कर सकते विस्तीर्ण,
दधीचि सम अस्थि है सबल,
हम हीं कौटिल्य, कृष्ण, परशुराम हैं,
यह हिन्दुस्तान नहीं,
जम्बूद्वीप का अभियान है ।

*उमा झा*

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उमा झा
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