कविता · Reading time: 1 minute

चेतना की उड़ान

उठाते रहो तुम अपनी आवाज़!
सुने ना सुने देश और समाज!!
कम से कम तुम्हारी चेतना तो
ले सकेगी एक ऊंची परवाज़!!
Shekhar Chandra Mitra

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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