Feb 19, 2021 · कविता
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चेतक – राणा (वीर रस)

खड़ खड़ खड़ खड़ खड़ ………..२

खड़ा हुआ रण में देखो राणा,
सिंह नाद सी है वो ज्वाला,
अब रण मस्तक से भर जायेंगे,
सुन टापों में राणा, चेतक के
ये शौर्य समर्पित गौरव को,
भाले तलवारों से चमकायेंगे,
आभा प्रताप की देख सभी,
धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ …………. २
धड़ मिट्टी में मिल जायेंगे।
खड़ा हुआ रण में देखो राणा।

गरजेगा दीप्तमय हो, तब ये अम्बर।
वषोॅ की प्यास बुझेगी, अब ये रण पर,
राणा की देख भुजाओं में अतुलित बल,
जब विश्वास दिखेगा, चेतक के कंधो पर।
फिर से इतिहास बदलने को निकले हैं दोनों।
मातृ भूमी के कर्ज़ उतारे जायेंगे,
भर भर भर भर भर …………२
भर जोश दिखाये जायेंगे
खड़ा हुआ रण में देखो राणा।

वीणा की तारों से भी वाणी गूँजेगी।
जब खड़ा देख आहट के पीछे मृत्यु सुनाई देगी।
और रक्त प्यास में भाले भी, नृत्य करेंगे।
तलवारों की अट्टहास से विजय पताका,
एक बार फिर से अवसर पायेगी,
फहराने को मातृ भूमि की धरती पर
सब भगवे में रंगे दिखाई देंगें
हर हर हर हर हर ………..२
हर महादेव गरजेंगे
खड़ा हुआ रण में देखो राणा।

रक्त में रंजित खड़ग आवाज देगी
मुझे भी शत्रुओ के रक्त से जब पार देगी
और मेरे जिस्म भी तब मान देंगे
प्रताप की मूंछों पे जब वो ताव देंगे
साज का विश्वास भी तब कह सकेगी।
मौत के बिस्तर को भी जब इस धरा पर
शत्रुओं के रक्त से संचार देंगे।
डर डर डर डर डर ……….२
डरे हुए से शत्रु दिखाई देंगे।
खड़ा हुआ रण में देखो राणा।

(वीर रस)
अवनीश कुमार श्रीवास्तव

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Avneesh Srivastav
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