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चूड़ियाँ……

Ramesh chandra Sharma

Ramesh chandra Sharma

गीत

August 13, 2016

चूड़ियाँ मुझको तब लुभाती हैं,
जब अनायास ही बज जाती हैं|
एक संगीत की सी स्वर लहरी,
बस मेरे मन में उतर जाती है|

मुझको वो खनखनाहट भाती है,
माँ के हाथों से जब भी आती है|
जब बनाकर वो प्यार से खाना,
अपने हाथों से खुद खिलाती है|
मुझको वो खनखनाहट भाती है..

मुझे वो खनखनाहट भाती है,
चाहे वो दूर से ही आती है|
राखियाँ बांधकर मेरी बहना,
आँख से नीर छलछलाती है|
मुझे वो खनखनाहट भाती है|

मुझे वो खनखनाहट भाती है,
हर समय मन को गुदगुदाती है|
जब भी आता हूँ मैं थका हारा,
बेटी सीने से लिपट जाती है|
मुझे वो खनखनाहट भाती है..

मुझे वो खनखनाहट भाती है,
मौन है फिर भी कुछ तो गाती है|
अलसुबह रोज़ जब प्रिया मेरी,
नहा के तुलसी को जल चढ़ाती है|
मुझे वो खनखनाहट भाती है,

-आर सी शर्मा “आरसी”
“दीपशिखा” विद्या विहार,
कोटा-342002

Author
Ramesh chandra Sharma
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित
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