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चुपके से निखरी रातों में. .

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

मुक्तक

November 28, 2016

बिन बारिश के मौसम में, तेरा बरसना मुझे याद हैं
उन दो कजरारी अखियों का, तरसना मुझे याद हैं,
चुपके से निखरी रातों में, तेरा दिल में आना याद हैं ,
कुछ बातों पर तेरा रोना, कुछ पर मुस्काना याद हैं .. .

– नीरज चौहान

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
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