Jul 12, 2020 · बाल कविता
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चुन्नू मुन्नू कैसे हो..

चुन्नू मुन्नू कैसे हो ?
मुँह लटकाये बैठे हो
चलो उठो अब दौड़ लगाओ
कूदो भागो मौज मनाओ।।

मम्मी जी ने डाँट दिया
मोबाइल भी छीन लिया
कार्टून ना देख सका
पबजी भी ना खेल सका।।

अरे अरे गुस्साओ मत
मत पालो ये गन्दी लत
बाहर निकलो खेलो खेल
सखा बनाओ कर लो मेल ।।

देखो चिड़िया चहक रही है
खुश होकर के फुदक रही है
बीन रही है दाना दाना
आओ देखो, छोड़ बहाना।।

अकड़म-पकड़म छुपन-छुपाई
पर ना करना कभी लड़ाई
लँगड़ी टाँग, गेंद और बल्ला
चोर-सिपाही और हो हल्ला।।

कितने सारे प्यारे-प्यारे
खेल खेल लो, मेरे दुलारे
भर लो खुशियाँ तन और मन में
पतंग उड़ाओ नील गगन में।।

हा हा हा हा आई हँसी
तुम मुस्काये छाई खुशी
अब मत रहना रूठे-रूठे
मोबाइल के खेल हैं झूंठे ।।

डा. यशवन्त सिंह राठौड़

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Yashwant Singh Rathore
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