कविता · Reading time: 1 minute

चुनाव

चुनाव

देखा
चुनाव का दौर
प्रचार का शोर
लगा हुआ
एड़ी-चोटी का जोर
किसी को बेचा
किसी को खरीदा
शह-मात का खेल
शेर-बकरी का मेल
किसी को रिझाया
किसी को लुभाया
बेले पापड़
हर तिकड़म लड़ाया
साम-दाम
दंड-भेद
सब आजमाया
किसी को हंसाया
किसी को रुलाया
मात्र चुनाव जीतकर
हराम का
खाने के लिए

-विनोद सिल्ला©

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