कविता · Reading time: 1 minute

चुनाव आइल नजदीक त,दुआर पे आइले नेताजी।

चुनाव आइल नजदीक त,
दुआर पे आइले नेताजी।
पूछलन हमरा बाबू जी से कवन काम नही होता जी,
पेंशन,गैस कनेक्शन सब हमरा हाथ मे बा।
बोल तहरा का बनवादी।
ई सब हटाव बोल पहिले का खइब,
कह हमरा से हम माँगवादी।
फलाना के आवास देवल हमरे ह,
चिलाना के फॉर्म भरवाईनी ह,
गांव के सब लोग त अपने ह,
एहि से कल मुर्गा मिट फ्री करवईनी ह,
जीतला के बाद काम असली होइ,
अभी ई त विश्वाश दियाता,
गांव मुहल्ला घूम घूम के परिचय अपन दिआता।

कहलन हमर बाबूजी – एतना दिन से कहा रल
का गइल रल भुलाय।
अब आइल बाड़ ओल पर माटी चढ़ावे
जब ओल गइल कोराय,
पयना देख आज ही बनाइनी ह।
अभी भईस के ऐसे पिटले नइखी
का कही केतना दिन हो गइल बा
अभी कुछु लिपले नइखी
सोच तानी दीआव तहरे के अभी अभी नया बाटे
भाग दुआर पर से जल्दी देर करब त लगेब साटे।
ससुरा कोन हमको खाने को देता जी
आया चुनाव नाजदिक तो दुआर पे आईले नेताजी।

#सूरज कुशवाहा#
संपर्क सूत्र-8873990054

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में सूरज कुमार, आप सभी को नमस्कार । में बिहार राज्य का निवासी हु में स्नातक पार्ट 1 का छात्र हु। मझे लिखना काफी ज्यादा पसंद है। मेरी पहली कविता…
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