चुटकुले की आत्महत्या

कभी-कभी आप किसी नीरस एवं बोझिल वातावरण को सरस एवं हल्का बनाने के प्रयास में किसी चुटकले को माध्यम बनाकर उसे सरस एवं हल्का बनाने का प्रयास करते हैं पर उसका असर आपकी आशा के विपरीत हो जाता है और आपका वह किस्से स्वरूप चुटकुला आपको उसके अर्थ के नए आयाम दे जाता है ।
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एक बार मानसिक रोग के वार्ड में राउंड के समय मनोचिकित्सक ने वार्ड में घुसते ही पाया कि वहां भर्ती सारे मरीज मुंह से भर्र – भर्र की आवाज निकालते हुए और मोटरसाइकिल की सीट पर बैठी हुई मुद्रा में इधर से उधर बेवजह दौड़ लगा रहे हैं । पर उनमें से एक दरवाज़े के पास शांत खड़ा था । डॉक्टर ने उससे पूछा यह लोग क्या कर रहे हैं ?
इस पर वह शांत खड़ा व्यक्ति बोला डॉक्टर साहब ये सब पागल हैं और इस समय आपस में मोटरसाइकिल की रेस लगा रहे हैं मैं पागल नहीं हूं और अब ठीक हो गया हूं आप प्लीज़ मेरी अस्पताल से छुट्टी कर दीजिए ।
इस पर डॉक्टर ने कहा अभी आ कर करता हूं । पहले तब तक मैं सामने वाले वार्ड में जाकर राउंड ले आऊं ।
इस पर वह व्यक्ति बोला अरे सर तो आप वहां तक पैदल क्यों जाते हैं और फिर अपने पैर से किक मारने की नकल करते हुए अपने मुंह से मोटरसाइकिल स्टार्ट होने की आवाज निकालते हुए बोला
‘ पीछे बैठिये ना सर , पैदल क्यों जाते हैं , मैं आपको मोटरसाइकिल से वहां तक छोड़ देता हूं ।’
मेरे इतना सुनाने के पश्चात किस्सा यहां पर समाप्त हो गया लेकिन वातावरण उतना ही गंभीर बना हुआ था थोड़ी देर बाद वो स्टाफ विस्मयकारी एवं उदासी मिश्रित प्रतिक्रिया देते हुए बोली
‘ वैसे डॉक्टर साहब पेट्रोल भी तो कितना महंगा हो गया है !’
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इसी प्रकार एक बार मैंने जब किसी महिला को अपने हिट संकलन ( p j ) में से यह किस्सा सुनाया –
एक बाहर एक आदमी एक खुले मैनहोल के पास झुक कर मैनहोल की ओर उंगली के इशारे से बोल रहा था
बीस ,बीस , बीस, बीस — — —-
कुछ देर बाद वहां से एक दूसरा आदमी उधर से गुज़रा , उसने उस गिनती करने वाले व्यक्ति से पूछा क्या बात है ?
इस पर उसने उस व्यक्ति को मैनहोल के अंदर झांकने का इशारा किया ।
जब वह पूछने वाला व्यक्ति मैनहोल के अंदर झांक कर देख रहा था तभी गिनती गिनने वाले व्यक्ति ने उसको मैंनहोल के अंदर धक्का देकर गिरा दिया । और अब फिर उसी मुद्रा में गिनने लगा — —- —-
इक्कीस , इक्कीस , इक्कीस — —–
चुटकुला यहीं समाप्त हो चुका था ।
फिर वह महिला बहुत उदास होकर बोली
‘ तो डॉक्टर साहब क्या फिर वह भी मर गया !
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उस दिन के बाद से मैंने निर्णय लिया कि चाहे कितनी ही बोरियत से क्यूँ ना गुज़रना पड़े कभी भी सामने बैठी महिला को कोई चुटकुला बिना उसकी समझदारी और विवेक ( आई क्यू ) का स्तर जाने अपने चुकुले की ऐसी की आत्महत्या नहीं करवाऊं गा , चुटकुला नहीं सुनाऊंगा ।

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