शेर · Reading time: 1 minute

चिराग और रोशनी

क्या जुल्मत पड़ी तेरे जाने के बाद ,
रोशनी के लिए हमें अपना चिराग ए दिल जलाना पड़ा

बड़ गए है जिंदगानी में अंधेरेे से बहुत ,
अब तो जला दो एक शम्मा मुहोबत की दोस्तों !

रोशनी का पीछा करते अंधेरे आए हाथ ,
अब इस तकदीर से क्या उम्मीद कर सकते हैं हम ।

रोशनी भी वही होती है जहां आप होते है ,
वरना ये कमनसीबी रही हमारी ,
अंधेरों के सिवा कुछ हासिल नहीं ।

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