''चाहत''

उसकी बात ही कुछ और थी उसका साथ ही कुछ और था
उसकी आँखे जब चमकती थी तो उसकी आंखो की चमक ही कुछ और थी ,,
उसकी आँखों के सागर में डूब जाने को दिल करता था

वो जिन रास्तों से गुजरती उन रास्तों को रोशन करने को दिल करता था ,,

उसका हाथ थामकर फ़लक तक चलने को जी करता था

उसके दिल के मैखाने में शराब की तरह उतरने को दिल करता था ,,
उससे अपने इश्क़ का इज़हार खुलेआम और पूरे दिल से करना चाहता था
पर वो इनकार न कर दे कहीं बस इसी बात से मन डरता था ,,
शायद इसीलिए दिल उनसे चुपके चुपके मोहोब्बत करता था ……

Written By ; Ladduuuu1023 ladduuuu

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