चाहतों की कस्ती

दिल तेरी चाहतों की यादों को,रो रो के झेला है
दिल कल भी अकेला था आज भी अकेला है
चाहतों की कस्ती में, नाम बस तुम्हारा है
आंसूओं की लहरे हैं, पलकों का किनारा है

संजय कुमार✍️✍️

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संजय कुमार,पिता श्री राम कुमार,माता श्रीमती श्याम कली, विलेज पूरे सुक्खा सिकंदर पुर महराज गंज...
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