.
Skip to content

चार मुक्तक

मधुसूदन गौतम

मधुसूदन गौतम

मुक्तक

March 19, 2017

मै तुमको जीने की कला एकसिखलाता हूँ।
अकिंचन हो जाने की राह तुम्हे बतलाता हूँ।
लेकिन तुम पड़ो नही इन बातो में सुनलो।
क्यों में लाखो की कारो में आता जाता हूँ।
***** फ्री फ्री कवि शंकर

हमरा क्या है भैया हम तो एक फकीर है।
करते योग कराते भी यही एक तकदीर है।
वो बात अलग है हो गई अरबो रूपयों में .
योग के बलबूते विरासत और जागीर है।

***** वावा आमदेव जी

हमको मत समझो यारा कि हम ढोंगी है।
हम तो साफ बोलने वाले एक सीधे योगी है।
अब राजनीति ही खुद चलकर आये तो क्या
मत समझो हम कोई राजनीती के जोगी है।

+++++ शाहित्यनाथ योगी

क्या होली क्या दिवाली सुनो जनाबे आली।
किसे छोड़ दे किसे पकडले मेरी बातनिराली।
दलबदलू बोलो या हस लेने की आदत वाला।
आ गया समझ में तो कहता हूँ ठोको ताली।

*** हसनोत सिंह बुद्दू

बीबी की कोई रोक नही है इसलिए तो हीरो है।
करते अपनी सोच सभीजैसे शासक नीरो है।
लेकिन एक बात समझ नही आती क्यों कर।
बिन बीबी के भी पप्पू क्यों राजनीती में जीरो है।

**** एक चाय वाला

Author
मधुसूदन गौतम
मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।
Recommended Posts
मै जुगनू हूँ रात का राजा !
लंगड़ लूला लोच नही हूँ ! किसी के सर का बोझ नही हूँ !! चम चम चमके जुगनू है हम ! कीड़े मकोड़े काकरोच नही... Read more
मैं संस्कार हूँ
मैं संस्कार हूँ, धर्म अधर्म समाहित मुझमें मैं ज्ञान रुपी भंडार हूँ । मैं संस्कार हूँ।। पाप पूण्य श्री गणेश हमीं से मैं जीवन तत्व... Read more
मुक्तक
तुमको एक मुद्दत से अपना बना बैठा हूँ! अपनी उम्मीदों का सपना बना बैठा हूँ! उलझा हुआ रहता हूँ मैं तेरे ख्यालों में, तेरी चाहत... Read more
मुक्तक
मैं इत्तेफाक से गुनाह कर बैठा हूँ! तेरे रुखसार पर निगाह कर बैठा हूँ! शामों-सहर रहता हूँ बेचैन इस कदर, तेरे लिए जिन्दगी तबाह कर... Read more