Skip to content

चार चोका

प्रदीप कुमार दाश

प्रदीप कुमार दाश

कविता

April 20, 2017

प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
———————
चार चोका
¤¤¤¤¤¤¤
01.
पूर्वा की गोद
खेले शिशु सूरज
भव्य ये दृश्य
खिल उठी री धूप !
देख प्रसन्न
बगिया के सुमन
हो कर मोद
पंछी के कलरव
करें भोर स्वागत ।
☆☆☆☆☆☆☆☆☆

02.
रंग रात के
मानो वे भेद रहे
मर्म तम के
या कहूँ जीवन के
हृदय गुफा
गहन अंधकार
सुख व दुःख
नीरवता की लहरें
बुन चलीं सन्नाटे ।
☆☆☆☆☆☆☆☆☆

03.
बढ़ी तपन
सूखने लगी घास
अब की बार
चिड़िया के मन में
जगी है आस
चुन चुन तिनके
बुनेगी नीड़
देख प्रसन्न पंछी
खुले सृजन द्वार ।
☆☆☆☆☆☆☆☆☆

04.
शैल खण्डों में
जाग उठी चेतना
आस्था से प्रीत
नयन ये तृषित
प्राण व्याकुल
गीत कलकल के
गाते सस्वर
निश्चल व निश्छल
बह चले निर्झर ।
☆☆☆☆☆☆☆☆☆

■ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
मो.नं- 7828104111

Share this:
Author
प्रदीप कुमार दाश
हाइकुकार : ♢ प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ♢ सम्प्रति : हिन्दी व्याख्याता 13 कृतियाँ : -- मइनसे के पीरा, हाइकु चतुष्क, संवेदनाओं के पदचिह्न, रुढ़ियों का आकाश, हाइकु वाटिका, हाइकु सप्तक, हाइकु मञ्जूषा, झाँकता चाँद, प्रकृति की गोद में, ताँका... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you