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चाय बनाई तो बनाई

मैने चाय बनाई तो बनाई।
नही बनाई तो नही बनाई।
तुम्हारे पैसे तुम रखो जी
मुझे नही करनी कमाई।
मै तो अपने हिसाब से बनाता हूँ।
मेरी रेट में ही सबको पिलाता हूँ।
फिर प्रश्न ही क्या
मैंने चीनी कितनी मिलाई।
मैंने बनाई तो बनाई……
पांच रूपये में पचास नखरे।
आप को अखरे तो अखरे।
मै नही ढोता कभी
समझे मेरे भाई।
मैंने चाय बनाई तो बनाई…..।
छोटा है मेरा कप माना ।
पर आपने कहाँ पहचाना।
मै प्यार से पिलाता हूँ
कुछ आपके समझ आई।
मैंने चाई बनाई तो…….।
लोग जब थक जाते है।
मेरे पास चले आते है।
मैं बनाता हूँ कडक फिर
फिर देखो चाय पिलाई
मैंने बनाई तो बनाई।
आगे से जब आओ।
तो प्रेम से पेश आओ।
फिर देखो कमाल अपना
जैसे कोफ़ी बनाई।
मैंने चाय बनाई तो बनाई।

***** मधु गौतम

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मधुसूदन गौतम
मधुसूदन गौतम
अटरू राजस्थान
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