चाय और आपका ख़्याल।

सुहानी हसीन सुबह के साथ,
एक मीठी चाय की चुस्की हो,
मेरे दिल में ख़्याल हो आपका,
और होठों पे मुस्की हो,

आइए ख़्यालों में बैठ के,
बातें दो-चार की जाएं,
हाथों में लेकर चाय का प्याला,
एक मुलाकात गुलज़ार की जाए,

हो सके तो कभी-कभी,
बेवजह भी मुस्कुराइएगा,
ख़्यालों में आके एक अच्छी सी ,
चाय ही पिला जाइएगा,

यकीन मानिये मेरी सारी,
ज़िंदगी निराली हो जाए,
ख़्यालों में आपके हाथ की जो,
एक चाय की प्याली हो जाए,

जब जी चाहे ख़्यालों में मेरे,
बेझिझक हुज़ूर चले आइयेगा,
आते आते साथ में अपने,
चाय ज़रुर ले आइयेगा।

कवि-अंबर श्रीवास्तव

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