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”चाक पर चढ़ी बेटी”

स्वर्णलता विश्वफूल

स्वर्णलता विश्वफूल

कविता

January 15, 2017

उस स्त्रीलिंग प्रतिमा,
यौवन-उफनाई प्रतिमा को–
एक पुरुष ने खरीदा
और सीमेंटेड रोड पर
पटक-पटक / चू्र कर डाला ।
प्रतिमा के चूड़न को–
सिला में पीस डाला,
और अपनी लार से
मिटटी का लौन्दा बनाया,
उसे चाक पर चढ़ा दिया,
कहा जाता है—
तबसे बेटी / चाक पर चढ़ी है ।

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स्वर्णलता विश्वफूल
स्वर्णलता 'विश्वफूल' को विदेश मंत्रालय, भारत सरकार (भारतीय सांस्कृतिक-सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली ) के कविता पुरस्कार, यह पुरस्कार प्राप्त करनेवाली बिहार की एकमात्र कवयित्री ; बिहार के शिक्षा मंत्री से 'बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार' ; राजभाषा विभाग, बिहार सरकार के... Read more

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