चांद से बातें -

चांद से बातें हुईं अपनी तो बस रात भर।
चांद भी सोया नहीं मेरी तरह से रात भर।
चांद था खामोश लेकिन मैने उससे किया सवाल।
क्यों उदास आज हो तुम , मुझसे कहो अपना हाल।
मै हूं भला जिस हाल में भी ,क्यों पूछती हो तुम मेरा हाल।
खुश किस्मत हो जो मां तुम्हारी करती सदा तेरा ख्याल।
मुझको चिढ़ाकर क्यों हो छिड़कती मिर्च नमक मेरे घाव पर।
चांद
मां तो सबकी अच्छी होती तुम क्यों मां से नाराज़ हो।
मेरी मां तो दूर हैं मुझसे तुम तो मां के पास हो।
मै तो मां की याद में खोई तुम क्यो फिर यूं उदास हो ।
जाने कैसे बेटे हो जो तुम मां से नाराज़ हो।
झुंझलाता फिर चांद
यूं बोला नाराज़ हूं इस बात पर।
चांद
परसों मां से बात हुई थी कुर्ता एक दिलाने की
। मां ने भी कर ली तैयारी कुर्ता नया सिलाने की।
जाने फिर क्यों ताल गई वोबात करे बहकाने की।
नाप नहीं है पास मेरे अचकन नया सिलाने की।
मेरा कुर्ता मिला नहीं है मेरी मां को नाप कर।
चांद
नाप नहीं दे पाते मां को दोष तुम्हारा अपना है।
एक नाप में देखे तुमको केवल मां का सपना है।
देखो ये सब तारे भी साथ सफर तय करते हैं।
इनके पास न मां है न कुर्ता फिर खुश हो सफर तय करते हैं।
रेखा कभी नाराज़ न होना मां से कभी किसी बात पर।
चांद से बातें हुई अपनी तो बस रात भर।

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