कविता · Reading time: 1 minute

चाँद

(करवा-चौथ स्पेशल)

सजी-सँवरी
छत पे खड़ी
मेरे घर का चाँद
बड़ी बावरी
ढूढ रही
आज ऊपर का चाँद
मैं बलि बलि जाऊँ
कहाँ छुपाऊँ
अपने सर का चाँद

-©नवल किशोर सिंह

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