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चाँद

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

June 26, 2017

????
ईद और करवाचौथ पर
रहता है चाँद का जलवा।
बाकियों दिन वह घटता –
बढ़ाता रहे, किसे है परवाह।
?
जिसे निहारने के लिए
साल में दो बार,
दो सम्प्रदाय रहते हैं बेताब से।
कब दिखे चांद, जो राहत मिले
दिन-भर के उपवास से।
????—लक्ष्मी सिंह?☺

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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