चाँद

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ईद और करवाचौथ पर
रहता है चाँद का जलवा।
बाकियों दिन वह घटता –
बढ़ाता रहे, किसे है परवाह।
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जिसे निहारने के लिए
साल में दो बार,
दो सम्प्रदाय रहते हैं बेताब से।
कब दिखे चांद, जो राहत मिले
दिन-भर के उपवास से।
????—लक्ष्मी सिंह?☺

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