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चाँद मेरा

डॉ मधु त्रिवेदी

डॉ मधु त्रिवेदी

कविता

October 19, 2016

चाँद जो हर पल दिल मेरे उगता है
सबसे प्यारा मुझको है
तम से घिरे दिल में जो मायूसी है
जगमगाहट फैलाकर
हर रोज सदाबहार मुझे बना देता है
देख मुख उसका रोज
सबेरा नित मेरा हर रोज हो जाता है
साथ जब वो हो मेरे
नहीं बोझिल कुछ कही नजर आता है
थक जाती हूँ जब मैं
प्यार का सुन्दर स्पन्दन मुझको देता है

चाँद में अक्स तेरा मैं सदा पाती हूँ
पास पा कर तुझको
दुनियाँ की सब खुशी पा जाती हूँ
आसरा जो तेरा मिला
गम सारे जग के भूल मैं जाती हूँ
रंगत चेहरे की मुझ पे
तेरी संगत से ही मुझ पर आती है
काजल नयनों का मेरा
मात्र नजर मिलने से खिल जाता है
हर अदा हर हरकत
तेरे संस्पर्श से दुगना हो जाती है

हर साल तू मेरी करवा चौथ है
सिंगार रूप मेरा
प्रिय सब तुझसे ही तो खिलता है
लबों की मुस्कराहट
प्रिय तू ही मन्द -मन्द मुस्कराया है
गालों की लालिमा में
प्रिय तूने ही निखार पाया हुआ है
तू रग रग में बसा है
माथ मेरे सिंदूर बन के तू सजा है
हर दिन हर करवा चौथ
प्रिय तुम चाँद बन तुम साथ रहना
खनक चूड़ियों की मेरी
जीवन को रंगबिरंगे रंग नित देती है
लिप्स की रक्त लालिमा
नवरंगों से जीवन को भर देती है

डॉ मधु त्रिवेदी

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डॉ मधु त्रिवेदी
डॉ मधु त्रिवेदी प्राचार्या शान्ति निकेतन कालेज आगरा स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका झकास डॉट काम जय विजय साहित्य पीडिया होप्स आन लाइन पत्रिका हिलव्यू (जयपुर )सान्ध्य दैनिक (भोपाल ) सच हौसला अखबार लोकजंग एवं ट्र... Read more
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