.
Skip to content

चाँद अब रोशनी नहीं देता

sunil soni

sunil soni

गज़ल/गीतिका

February 22, 2017

चाँद अब रौशनी नहीं देता
अब तो एक आग सी निकलती है ।
देख लो आके उनके आँगन में
बर्फ अब सर्दियों में गलती है ।।
किसको जाना कहाँ ?कहाँ मंजिल?
हर गली रोज ढलती है ।
बैठो गर पाना है पता मंजिल
यहाँ स्वारथ की रेल चलती है।।
तेल में डूब और उसे पीकर
बाती दीये की क्यों मचलती है ।
बात दुनियां की भी निराली है
अपना कह कर उन्हीं को छलती है ।।
क्यों करे बात कोई दरिया की
जहां कागज की नाव चलती है ।
सच की दुनियां तो अब हुई तन्हां
बात अब झूठ की ही चलती है ।।

Author
sunil soni
जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637
Recommended Posts
जुवाँ पर बात दिल की न आने देता
जुवाँ पर बात दिल की मैं , कभी आने नहीं देता किसी भी बेवफा पर दिल , कभी जाने नहीं देता किया बर्बाद अपने को... Read more
चाँद
चाँद ✍✍ हर रोज आसमाँ में दिखाई देता है चाँद फिर क्यों ढूँढ़ती हूँ क्यों तुझे चाँद तू पर्याय है मेरे चाँद का क्योंक अक्स... Read more
बस तुम्हारे लिए !
बस तुम्हारे लिए ! बस तुम्हारे लिए, फूल खिलता है क्यों, दिन निकलता है क्यों, रात ढलती है क्यों, यों तमन्ना किसी की मचलती है... Read more
बेटियां
मैं नहीं वो कली अब, खिली हो जो मुरझाने को, अब नहीं मैं अबला नारी, बनी हो जो सताने को. नहीं बनना है अब मुझे,... Read more