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“चलो मोड़ दो एक बार फ़िर”

Dr.Nidhi Srivastava

Dr.Nidhi Srivastava

कविता

December 23, 2016

चलो मोड़ दो एक बार फ़िर
मेरी ज़िंदगी के गीले पन्नों को
बहुत कुछ सोख रखा है इसने
कुछ ख्वाहिशें, कुछ हकीकत
निचोड़ना मुमकिन नहीं है मगर
एक नया पन्ना इंतज़ार में है
शुरूआत ना सही अंत ही सही
कुछ राज , कुछ मात सोखने को
दफ्न हो कुछ और ज़ख्म का दरिया
चलो मोड दो एक बार फ़िर .
…निधि…

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Author
Dr.Nidhi Srivastava
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"
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