चलो मितवा हम प्यार करें

चलो मितवा हम प्यार करें

नील निलय के अंक में
प्रीत का उपहार धरें
नयन के पनघट पर, नेह की गागर से
नैना दो-चार करें

चलो मितवा हम प्यार करें

प्रीत की गात पर, प्रणय की रक्ताभ करें
तेरे नाम सिंदूर से आज अपनी मांग भरें

चलो मितवा हम प्यार करें

अधरों से माधुरी चुरा लें
अंग लग के सांवरा तन अपना लें
चलो मितवा हम प्यार करें

कुञ्ज में किलोल करें,
हर कली से मेल-जोल करें
बाग़ों का मौसम चुरा लें
सर्वत्र अपने प्रेम का गुंजार करें
चलो मितवा हम प्यार करें

रात की अंगड़ाई से तन सुरमई बना लें
तेरे स्पर्श का श्रृंगार करें
जन्मों के मीत से अभिसार करें
चलो मितवा हम प्यार करें

सुनील पुष्करणा

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