चलो फिर से~

चलो फिर से अजनबी हो जाए
तुम चुपके से हमें देखो
हम तुम्हें देख शरमा जाए
चलो फिर से…
वही अन्जान सी बातें
वही बेवक़्त मुलाकातें
बस बदले नहीं कुछ भी
वही दिन हों वही रातें
हम कहदें सूरत चाँद सी तेरी
तुम कहदो झूठे ग़ालिब हो
हर लब्ज़ करे बयाँ तुमको
और तेरी परछाई बन जाए
चलो फिर से…
फिर से तुम नग़मे बयां करो
फिर से हम शहजादे बन जाए
तुम कह दो गले लगाने की
और हम अंजान मुक़र जाए
चलो फिर से अजनबी बन जाए

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b.sc (msj college bharatpur) b.ed(mstt college bharatpur) & m.sc mathematics(brij university)
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