बाल कविता · Reading time: 1 minute

चलो चाकलेट के बाग़ लगाते हैं

चलो चलकर चाकलेट के बाग़ लगाते हैं
मैंगो फ्रुटी से भरा हुआ तालाब बनाते हैं

बिस्किट के पत्ते लालीपाप की कलियां हों
सेव, नमकीन,लाइचीदाना की फलियां हों

फ्रेन्चफ्राइ, फिंगर, फोंफी की डाली बने
प्यारी ,चुलबुली डॉगी बाग़ का माली बने

जड़ में चीनी,महिया, राब की खान हो
नानखटाई, शकरपारे से बनी पान हो

चीप्स, कोफ्ता, कोरमा उसकी छाल हो
मेरा पेड़ हरा, पीला, नीला न लाल हो

नूरफातिमा खातून “नूरी”
19/5/2020

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