Skip to content

चलो चलो ए राही

Dr Vipin Sharma

Dr Vipin Sharma

कविता

February 12, 2018

चलो चलो ए राही, अपनी मंज़िल है आसान नहीं
रुको नहीं तुम पल भर, अब है रुकने का अरमान नहीं
चलो चलो ए राही..

बढो जतन से और लगन से , चूम लो चाँद सितारे
कठिन डगर पर चलते चलते , सुन लो गीत हमारे
सपना होगा सच्चा तेरा, नींद का रहे निशान नहीं।
चलो चलो ए राही..

राहों से मंज़िल मिल जाती, मंज़िल से कुछ राहें
बाधाएं हम को उलझातीं, सुलझाती कुछ बांहें
पास पहुंच बैठे हैं हम, दूरी का अनुमान नहीं।
चलो चलो ए राही….

अभी न थकना, पहुंचने वाले हैं नदिया के धारे
मिल जाएंगे सागर में, ज्यों मिलते मीत न्यारे
सागर की गहराइयों का, अभी तुम्हे इमकान नहीं।
चलो चलो ए राही….

जीवन सांसें चलती जाती, बन आती कुछ आसें
पंखों से मिलती परवाज़े, परवाज़ों से निगाहें
अम्बर की सीमाओं का अभी तुम्हें ज्ञान नहीं।
चलो चलो ए राही…

विपिन

Share this:
Author
Dr Vipin Sharma
From: Kangra , Himachal Pradesh
I am in medical profession , Professor in Orthopedics . Writing poetry is my hobby.
Recommended for you