चलो कुछ बात करते हैं

????
चलो कुछ बात करते हैं।
कुछ तुम अपनी कहो,
कुछ हम सुनाते हैं।

यूँ खामोश बैठने से
अच्छा है कि
कुछ गुनगुनाते हैं।

कहते हैं कि –
खामोशी बोलती है।
पर ये
इन्सानों को तोड़ती है।

चलो
इन खामोशी को तोड़
खुल कर मुस्कुराते हैं।
चलो कुछ बात करते हैं।

कुछ अपनी सुनाओ
कुछ हम सुनाते हैं।
चलो कुछ बात करते हैं।

जिन्दगी की
कुछ खुशियाँ
कुछ परेशानियाँ
एक दूजे से बाँट लेते हैं।
चलो कुछ बात करते हैं।

चलो दोस्ती की
चटाई पर
गपशप लड़ाते हैं।
चलो कुछ बात करते हैं।

बचपन की क्या
जवानी के हर
किस्से सुनाते हैं।
चलो कुछ बात करते हैं।

जीवन के हर क्षण
से कुछ नगमा चुराते है।
चलो कुछ गुनगुनाते हैं,
चलो कुछ बात करते हैं।

बीते दिनों की यादो को
फिर से दुहराते हैं।
कुछ तुम अपनी कहो
कुछ हम सुनाते हैं।

चलो दोस्ती की
चटाई पर
गपशप लड़ाते हैं।
????-लक्ष्मी सिंह??

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 180

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share