मुक्तक · Reading time: 1 minute

चलो उस पार चलते हैं….

चलो उस पार चलते हैं, जहाँ गम का निशां ना हो
जहाँ कल-कल नदी बहती, हवा का खूब आना हो
न हों छल-छद्म के कंटक, सभी सुख से रहें मिलकर
बरसता हो जहाँ सावन, खुशी का ना ठिकाना हो
– © सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

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