Skip to content

” चलो इक दूजे से कुछ ऐसे मिल जायें” ☺

इंदु वर्मा

इंदु वर्मा

कविता

January 9, 2017

चलो इक दूजे से कुछ ऐसे मिल जायें।
पानी में जैसे,कोई मिश्री घुल जाए
एक मस्ज़िद में कहीं “आरती” सुन आयें
कुछ दूर मंदिर में वहीँ “आयत” पढ़ आयें
चलो इक दूजे से हम ऐसे मिल जायें

ईद पे आओ कुछ “दीप” जगमगायें
दीवाली पे अपनों से कुछ “ईदी” ले आयें
गिरजा में “गुरबानी” चलो हम सुन आयें
गुरूद्वारे में श्रद्धा से “मोमबत्तियां” जलायें
चलो एक दूजे से हम ऐसे मिल जायें

मुशायरे में आओ कुछ “कविता” गुनगुनायें
कवि से वहीँ एक “ग़ज़ल” सुन आयें
आओ इक दूजे में कुछ ऐसे घुल जायें
पानी में जैसे कोई मिश्री घुल जाए??

©”इंदु रिंकी वर्मा”

Share this:
Author
इंदु वर्मा
मैं "इंदु वर्मा" राजस्थान की निवासी हूं,कोई बहुत बड़ी लेखिका या कवयित्री नहीं हूं लेकिन हाँ लिखना अच्छा लगता है सामाजिक विषयों और परिस्थितियों पर मन और कलम का गठबंधन करके ☺ कोई किताब या पत्रिका भी नहीं छपी पर... Read more
Recommended for you