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चले जाते हो….

Zo Zo Sandeep Yadav

Zo Zo Sandeep Yadav

गज़ल/गीतिका

January 30, 2017

मुझसे नजरें मिलाकर चले जाते हो,
दिल ये मेरा चुराकर चले जाते हो।।
कहना चाहूँ अगर कुछ भी सुनते नही,
हाथ अपना छुड़ाकर चले जाते हो।।
बात दिल की दबी दिल में ही रह गयी,
होंठ अपना दबाकर चले जाते हो।।
मन करे गर कभी देखने का तुम्हे ,
अपना चेहरा छुपाकर चले जाते हो।।
हक जताकर के दिल पे मेरे जानेजां,
आग दिल में लगाकर चले जातेहो।।
मानो छायी हो अंबर में काली घटा,
काली जुल्फें उड़ाकर चले जाते हो।।
पल में संदीप मर जाता है देखकर
जब भी पलकें गिराकर चले जाते हो।।
संदीप यादव(Zo Zo)
आजमगढ

Author
Zo Zo Sandeep Yadav
संदीप यादव अजगरा,अतरौलिया। जिला:- आजमगढ़ विधा:- गजल,गीत व मुक्तक ।।
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