चली चली रे मोदी की हवा चली रे --आर के रस्तोगी

( चली चली रे पतंग मेरी चली रे गीत पर आधारित एक पैरोडी )

चली चली रे मोदी की हवा चली रे |
ले के लक्ष्य तीन सौ के पार ||
हो के विकास की डोर पर सवार |
सारी पार्टिया देख देख जली रे ||
चली चली रे मोदी की हवा ……..

वह किसी से न घबराये |
वह आगे ही बढता जाये ||
चाहे सब कुत्ते पीछे पड जाये |
भो भो करके उसे डराये ||
कुतिया भी दुम दबा कर चली रे |
चली चली रे मोदी की लहर चली रे ||

माया ममता महबूबा भी आई |
पप्पू की मम्मी भी चिल्लाई ||
महबूबा ने भी जोर लगाया |
कश्मीरियों को खूब उकसाया ||
वह किसी के वश में न आया |
सब बिल्लियाँ बन कर चली रे ||
चली चली मोदी की …..

उसकी पार्टी है जानी पह्चानी |
दिला रही है याद उनको नानी ||
उस पर चढ़ रहा न दूजा रंग |
चाहो डालो रंग में तुम भंग ||
उसने तो निराली चाल चली रे |
चली चली रे मोदी की …….

चाहे बुआ रोये,भतीजा रोये |
चाहे रोये आपका केजरीवाल ||
चाहे कुर्ता फाड़ कर राहुल भैया |
चाहे सब जगह मचाये बबाल ||
कितनी भी चाल चल ले ये सब |
चलेगी न अब उनकी चाल रे ||
चली चली रे मोदी की …

आर के रस्तोगी

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