Jun 10, 2016 · कविता

‘चला गजोधर भईस चराई!’

चला गजोधर भईस चराई,
जुग जमाना बदलिगा भाई!

लउँडे घूम रहे लगाये टाई,
पढ़े लिखे सब भईस चरावैं,
अनपढ़ कीन्हे खूब कमाई,
चला गजोधर भईस चराई !!

कलुआ भलुआ बाम्बे सूरत,
हमका तोहका का जरुरत!
खेत बेच के किहन पढ़ाई ,
चला गजोधर भईस चराई!

चालिस जगह दिहन इंटरब्यू ,
हमहू फसे उनके चक्रब्यू!
लगा पाच सौ फाम भराई ,
चला गजोधर भईस चराई!

बोल हाय बाय हमका भेजिस ,
जैसे घरे से कूकुर खेदिस!
कहिस आशीष हम फोन लगाउब ,
जल्दी अच्छी जॉब बताउब!
फोन नहीं किहिस का बताई ,
चला गजोधर भईस चराई!

बईठब बढ़िया चढ़े पेढ़ पर ,
भैसी चरिहीं हरे मेड़ पर!
कड़ी दुपहरी जब होई त ,
भैसी डबहा परि जई भाई ,,
चला गजोधर भईस चराई!

लइके चलब मटिआरे म ,
मजा करब झरिआरे म!
लल्लू झल्लू भईस बहोरिही ,
बल्लू भाई चना उखडिही!
हम करबय खुब चना भुजाई ,
चला गजोधर भईस चराई !

_09200573071_आशीष तिवारी

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