शेर · Reading time: 1 minute

चराग बुझ जाए।

आज फिर याद में जो तुम आए।
मेरे आंखों में फिर लहू छाए।

दर्द कितना है सोचिए इतना
लाश जिंदा हो तो किधर जाए ।

मुझको अंधेरों से मुहब्बत है
तू दुआ कर चराग बुझ जाए।

दीपक झा रुद्रा ❤️

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