चमत्कारी अंगोछा

एक बार एक नेताजी को मिला एक अंगोछा।
नेताजी ने जैसे उससे अपना हाथमुँह पोछा।।
यह देखकर अंगोछा लगा जोर से चिल्लाने।
और शुरु कर दिया अपनी बड़ाई बताने।।
सुन ओ मेरे प्यारे नेता मैं साधारण नहीं अंगोछा।
जो तुमने इस तरह से अपना हाथमुँह है पोछा ।।
जो बात कहता हूँ अब सुनो धर कर ध्यान ।
दे रहा हूँ फोकट में जो महानतम ज्ञान ।।
कहानी है जो सदियों -सदियों पुरानी।
हुआ करता था एक नेता नाम का प्राणी।।
लगा रहता था हमेशा करने में कुछ जुगाड़ ।
कि अब कैसे बन पाएगा वोट का पहाड़।।
यह सोचकर करने लगा मतेश्वर बाबा का ध्यान ।
बाबा मतेश्वर प्रकट हो गए और दे दिया एक अंगोछा।
फिर बोला वो जानते हो वह कौन अंगोछा था अन्जान ।।
नेता बोला नहीं रे मेरे प्यारे अंगोछे मैं यह कैसे जानूँगा।
अंगोछा इस बार अकड़कर बोला अरे तुम बिल्कूल हो मुढ़-मति अज्ञान ।।
सुनो मैं हूँ वही अंगोछा अब मैं अपनी बड़ाई क्या स्वयं करुँगा।
सुनो अब जो मैं बतलाता हूँ वोट माँगने वैसे जाना जैसे में बतलाता हूँ।
नेता बोला हाँ बताओ और क्या-क्या है करना?
अंगोछा बोला वोट माँगने जब भी जाओ तो मुझे हमेशा रखना साथ।
नेता बोला ठीक है अब बताओ क्या-क्या और रहेगा साथ।।
अंगोछा बोला साथ में सबसे पहले लिस्ट हो कसमों वाली।
नेता बोला हाँ जी बिल्कुल साथ में याद से रखवाली।
अंगोछा बोला पहले जाते ही है तुमको यह है कहना।
तुम ,माता हो,पिता हो कैसे हो विस्तार से कहना।।
नेता बोला ठीक है आगे भी कुछ करना है बोलो।
अंगोछा इस बार जोर से बोला जब बोलो तब मिश्री घोलो।।
नेता बोला ठीक है आगे अब क्या अंगोछा भाई।
अंगोछा बोला चाहे कुछ भी बोलो हर बात में देना पीछले साल के नेता की दुहाई।
मित्रों आज के परिवेश में यही तो होता है ।
जो बात यह अंगोछा नेता से कहता है।।

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कविताएं मेरी प्रेरणा हैं साथ ही मैं इन्टरनेशनल स्कूल अाॅफ दुमका ,शाखा -_सरैयाहाट में अध्यापन...
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