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=* * चमके किस्मत का तारा * *=

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 30, 2017

हाथों की लकीरों पर न करो अंधा विश्वास
कभी-कभी ये कर देती हैं भविष्य का नाश।

इंसान की किस्मत की ये लकीरें
बन जाती हैं कई बार दिमाग की जंजीरें।
वह मान बैठता है इनको बिलकुल सच्चा
बैठ जाता है इनके भरोसे और खाता है गच्चा।

किस्मत को मिला दो उसकी सखी मेहनत से।
चले जहां-जहां जादू किस्मत का
साथ चले वहां-वहां रुतबा मेहनत का।
फिर देखो किस्मत का फेर
किस्मत चमके लगे न देर।

—रंजना माथुर दिनांक 30/07/2017
मेरी स्व रचित एवं मौलिक रचना।
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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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